भाभी और उनकी सहेली 3

 

पिछले अंक से आगे की कहानी ………………….

अब हमने जगह बदल ली, Hindi Sex Stories Antarvasna Kamukta Sex Kahani Indian Sex Chudai भाभी मेरी गोद में लेट गईं और उन्होंने मेरा बाबूराव अपने मुँह में ले लिया।

मैं अपनी सिसकारियों पर रोक लगाए हुए था, यह चरम सीमा थी।

मैंने 3-4 बार उनकी चूचियाँ कस कर मसल दीं थी, इस बीच मेरा वीर्य उनके मुँह में छुट गया, भाभी ने पूरा वीर्य मुँह में लिया उसके 5 मिनट बाद हम दोनों अलग हो गए।
हम दोनों ने अपने कपड़े ठीक करे।

दस मिनट बाद हमारा हमारा स्टॉप आ गया था।

स्टॉप पर उतर कर भाभी साड़ी का पल्लू हटाकर मुझसे बोलीं- देखो, ब्लाउज के सारे बटन टूट गए, सिर्फ एक बचा है।

मैंने देखा कि उनके ब्लाउज का सिर्फ नीचे का एक बटन बचा था, जिसे उन्होंने लगा लिया, चूची ब्लाउज में कहने मात्र को बंद हो गए थे, उनकी नंगी गोलाइयाँ और काली निप्पल ब्लाउज से बाहर झांक रहा थी और चुचियों की सुन्दरता में चार चाँद लगा रही थी।

भाभी ने ब्लाउज को पल्लू से ढकते हुए कहा- अब ऑटो में चूचियों पर रहम कर देना।

भाभी और मैंने ऑटो कर लिया, ऑटो में भाभी ने मेरे मुँह पर पप्पियों की बारिश कर दी और बोलीं- रास्ते में बड़ा मज़ा आया।

पूरे रास्ते हम पति पत्नी की तरह बैठे और एक दूसरे को बाहों में भरकर स्टॉप आने तक लब-चुम्बन करते रहे।

दस बजे हम डॉली के घर थे, वो घर में अकेली थी।
डॉली 22-23 साल की एक कमसिन बदन की मालकिन थी, थोड़ी सांवली थी लेकिन उसके चेहरे से जवानी का रस टपक रहा था।

भाभी को देखकर वो उनसे चिपक गई और बोली- तुमसे मिलकर बहुत अच्छा लग रहा है।

अन्दर घुसते ही भाभी ने डॉली की तरफ देखते हुए कहा- जय, यह मेरी पक्की सहेली है, हम साथ साथ पढ़े हैं। इसे मैं डॉली कम कुतिया ज्यादा बोलती हूँ, यह भी मुझे प्यार में रंडी बुलाती है।

डॉली से भाभी बोलीं- यह मेरा देवर जय है, इससे शर्माने की कोई जरूरत नहीं, पूरे रास्ते हम मज़े करते आ रहे हैं।

डॉली भाभी का पल्लू हटा कर ब्लाउज का एक मात्र बटन खोल कर उनकी चूचियों पर हाथ फिराते हुए बोली- हाँ हाँ… दिख रहा है, पूरे रास्ते तू अपने गुब्बारों में देवर जी से हवा भरवाते हुए आ रही है, तभी तो एक बटन बचा है।

भाभी हँसते हुए अपनी साड़ी उतारने लगीं और डॉली से बोलीं- तू तो एक कुतिया की तरह ही सोच सकती है।

भाभी ने ब्लाउज भी उतार दिया और डॉली से बोलीं- जा जल्दी से अपनी एक नाइटी दे दे।

यह सब देखकर मेरा बाबूराव फिर खुलने लगा था।

डॉली कमरे से बाहर चली गई। पेटीकोट में भाभी मेरे सामने टॉपलेस खड़ी थीं, अंगड़ाई लेते हुए उन्होंने अपने चूची हिलाए और बोली- आज रात पूरी अपनी है जमकर मज़े करेंगे।

मुझको एक गोली का पत्ता देकर बोलीं- सुबह शाम एक एक खा लेना, चोदने में मज़ा आ जाएगा, पूरे दिन 5-6 बार चुनमुनिया मारने के बाद भी कमजोरी नहीं लगेगी।

यह कहकर भाभी बाहर चली गईं..

थोड़ी देर बाद भाभी और डॉली आ गए, दोनों ने सेक्सी लो कट नाइटी पहन रखी थी।

खाने के बाद हम लोग साथ बैठकर डबल बेड की रजाई में मूंगफली खाने लगे।

भाभी और डॉली सामने बैठी थीं हम लोग बातें करने लगे भाभी मेरे पैर अपने पैर से रजाई के नीचे से सहलाने लगीं।

उधर डॉली जब भी झुकती उसकी लो कट ढीली नाइटी से उसकी पूरी चूचियाँ दिखने लगतीं थीं।

मैंने भाभी की नाइटी के अन्दर से पैर उनकी जाँघों में घुसा दिए थे और पैरों से उनकी जांघें गरम कर रहा था।

बारह बजे के पास भाभी डॉली से बोली- अब सोते हैं, तू अपने कमरे में सो जा, मैं तो इसके साथ ही सो जाऊँगी।

डॉली भी खुल गई थी, मुस्कराते हुए बोली- हाँ हाँ रंडी, सो जा, तुझे अपनी भट्टी की आग जो बुझानी है, तेरा ऑपरेशन चुनमुनिया जो चल रहा है। लेकिन इस बेचारे के घोड़े की जान मत ले लेना।

भाभी हँसते हुए बोली- तू तो एक कुतिया की तरह ही सोच सकती है… यह तो मेरा देवर है देवर तो बच्चे के सामान होता है।
थोड़ा दूध पिला कर सुला दूँगी। वैसे भी मेरी भट्टी पर तो तेरे भाई का जय है, अब तू तंग मत कर और जाकर सो और हमें भी सोने दे।

डॉली वहाँ से चली गई।

भाभी ने डॉली के जाने के बाद पर्स से निकाल कर एक गोली खा ली और बोलीं- गर्भ निरोधक है, मुझे तो नंगे बाबूराव से ही चुदने में मज़ा आता है।

उन्होंने अपनी नाइटी उतार दी और मुझे भी पूरा नंगा कर दिया।
मेरे बाबूराव को सहलाते हुए बोलीं- आज किसी का डर नहीं, आज तो डलवाने में मज़ा आ जाएगा, लाइट खुली रहने देना, रोशनी में चुदने का तो एक अलग ही मज़ा है, पूरी अपनी औरत समझ कर चोदना यहाँ किसी का डर नहीं, यह डॉली तो अपनी यार है कुतिया को मैंने पहले ही बता रखा है कि अपने देवर से चुदने आ रही हूँ, न कि एग्जाम देने… तभी हरामण, ऑपरेशन चुनमुनिया चुनमुनिया कर रही थी।

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उन्होंने झुककर मेरा बाबूराव मुँह में ले लिया और चुसना शुरू कर दिया।

रास्ते भर मैं बुरी तरह से उतेजित था, मैंने भाभी के मोटे मोटे नितंब दबाने, सहलाने और पीटने शुरू कर दिए, बीच बीच मैं उनकी गाण्ड में भी उंगली घुस देता था।

थोड़ी देर बाद भाभी लेट गईं और टांगें चौड़ी करके बोलीं- आह आह… अब पेल दो, रहा नहीं जा रहा है।

उनकी चुनमुनिया मेरी आँखों के सामने थी, मैं उनके ऊपर चढ़ गया, अपने हाथ से चुनमुनिया पर मेरा बाबूराव लगाते हुए बोली- आज बस में तुमने बहूत तड़पाया है। अब इस कमीनी फ़ुद्दी को फाड़ दो।

मैंने भाभी की चुनमुनिया में बाबूराव घुसेड़ दिया और उसे अन्दर पेलने लगा।

उनकी दोनों चूचियाँ मेरी मुट्ठी में थीं, एक दूसरे से दूधों को मिलाते हुए मैंने चुनमुनिया की चुदाई शुरू कर दी थी।

भाभी ने मेरी पीठ पर अपनी टांगें मोड़ लीं थी और बाबूराव को अपनी गाण्ड हिलाते हुए पूरा अन्दर तक घुसवा लिया, मेरे टट्टे भी उनकी चुनमुनिया पर तबला बजाने लगे थे, बाबूराव भाभी की चुनमुनिया फाड़ रहा था।

हम दोनों के बदन रगड़ खा रहे थे, भाभी आह उह उह की आवाजें बिंदास भर रही थी और अपके चूतड़ हिला कर बाबूराव अन्दर बाहर करते हुए निडर होकर चुदने का मज़ा ले रही थीं।

बार बार उतेजना से वो चिल्ला रही थीं- चोदो जय चोदो… इस कमीनी चुनमुनिया को चोदो… बड़ा मज़ा आ रहा है… आह पेलो न… उह आह उह उई उई उई… और अन्दर… और अन्दर… वाह क्या पेला है, वाह वाह…

भाभी की आहों ने मुझे पूरा उत्तेजित कर दिया था, मैं पूरी ताकत से धक्के मार रहा था, दोनों तरफ से पूरा सहयोग हो रहा था।

थोड़ी देर में मेरा गर्म लावा उनके गर्भ प्रदेश में घुस गया, उन्होंने भी ढेर सारा चुनमुनिया रस छोड़ दिया था।

हम दोनों कस कर दुबारा एक दूसरे से चिपक गए।
यह सेक्स का क्लाइमेक्स था।
उसके बाद एक दूसरे से चिपक कर हम सो गए।

सुबह एक बार भाभी ने फिर मुझे अपनी बाहों में भर लिया और हम एक बार फिर एक दूसरे से चूमा चाटी करने लगे। तभी बाहर से दरवाज़ा खटका डॉली की आवाज़ आई- रण्डी, अब उठ जा, एग्जाम दे आ, मैं चाय बनाने जा रही हूँ। भाभी नंगी उठीं और दरवाज़ा की सांकल खोलकर फिर रजाई में लेट गई और बोलीं- चाय पीकर कपड़े पहनेंगे। मेरा तना हुआ बाबूराव सहलाते हुए बोलीं- आह, चुदने का बड़ा मन कर रहा है लेकिन सात बज़ रहे हैं अब तो उठाना पड़ेगा। तुम दिन में यहीं रहना और एक बार इस डॉली कुतिया पर ट्राई मार लेना, साली रात मैं कह रही थी देवर तो बड़ा चिकना है, पति से तो इसका झगड़ा एक साल से चल रहा है, चुनमुनिया भी कुतिया की उबल रही होगी। भाभी के निप्पल उमेठते हुए मैंने कहा- लेकिन डॉली तो देखने में आपसे कम सुंदर और काली है, उसकी चूचियाँ भी छोटी छोटी हैं, आप जितना मज़ा कहाँ आएगा? बाबूराव का टोपा रगड़ते हुए भाभी बोलीं- चुनमुनिया का मज़ा गोरे काले, दुबले पतले, से नहीं चोदने से आता है और चोदू लोग मिलती हुई चुनमुनिया को छोड़ते नहीं है। मौका मिले तो चूकना नहीं, चुनमुनिया चोद कर ही छोड़ना दबा दबु के छोड़ दिया तो तुम्हें चूतिया मानेगी। थोड़े खिलाड़ी तो अब तुम हो ही गए हो।

मैं रजाई के अन्दर घुस कर उनकी एक चूची मुँह में लेकर चूस रहा था और दूसरी दबा रहा था, भाभी बोलती जा रही थीं। तभी डॉली चाय लेकर आ रही थी, भाभी ने रजाई नीचे खिसका दी और बोलीं- इसी तरह चूसते रहो, कुतिया की बुर में खुजली हो रही होगी रात का सोच सोच के ये सब देखकर और गर्म होगी। तभी डॉली कमरे में आ गई, भाभी डॉली से बोलीं- रात को थके थे, जल्दी नींद आ गई, बेचारे को दुद्दू भी नहीं पिला पाई, इतनी दूर साथ आया है, इतना तो बनता ही है। उसके बाद डॉली के कान में भाभी ने कुछ फुसफुसाया। डॉली हँसते हुए बोली- रंडी अब उठ जा, एग्जाम दे आ। इसके बाद हम अलग हो गए, सबने साथ साथ चाय पी, उसके बाद भाभी उठीं और गुसलखाने में फ्रेश होने चली गईं। डॉली मेरी तरफ देखते हुए बोली- रात को तो मज़ा आ गया होगा… चलो तुम भी तैयार हो जाओ, हम दोनों भाभी को छोड़ आते हैं। मैं कपड़े नहीं पहने था, सिर्फ चादर ओढ़े था, बोला- दीदी थोड़ी देर को बाहर जाओ ना! डॉली बोली- दीदी की माँ की चुनमुनिया, मुझे डॉली बुलाओ, कुतिया और रंडी भी चलेगा लेकिन दीदी दोबारा बोला तो गाण्ड में बांस घुसा कर यहाँ से भगा दूँगी। अच्छा यह बताओ कल भाभी से क्या मज़े कर लिए? हॉर्न तो मेरे सामने बजा ही रहे थे।

मैंने झेंपते हुए झूठ बोला- हम तो थके हुए थे, लेटते ही नींद आ गई थी, वो तो सुबह सुबह भाभी ने चिपका लिया था। डॉली बोली- ओह तुम तो मुझे अच्छे शरीफ लड़के लगते हो। यह ललिता कुतिया बहुत झूठ बोलती है, कान में कह रही थी कि रात भर जय ने सोने नहीं दिया, ऊपर पहाड़ मसल डाले और नीचे सुरंग खोद डाली, दोनों जगह खूब बजाया। पहले इस रंडी को छोड़ कर आते हैं फिर लौट कर बातें करते हैं। उसने साइड में पड़ा मेरा नेकर उछाल के फेंका और बोली- ये लो, पहनो मैं अभी आती हूँ। मैं नेकर पहन कर फ्रेश होने लगा। तभी भाभी नहा कर नाइटी में बाहर आ गईं और डॉली तौलिया लेकर अन्दर गुसलखाने में चली गई।

भाभी ने इशारे से मुझसे कहा- गुसलखाने में झांककर देखो। जब मैंने अन्दर झाँका तो दंग रह गया डॉली टॉयलेट की सीट पर टांगें चौड़ी करके नंगी बैठी हुई थी और अपनी चुनमुनिया पर मोमबत्ती फिरा रही थी। उसके कमसिन बदन पर झूलते हुए चूचों ने मेरे बाबूराव में आग लगा दी। भाभी ने पीछे से चिपककर मेरे नेकर में हाथ डालकर बाबूराव पकड़ लिया और सुबह के कुमुनाते बाबूराव को सहलाते हुए कान में बोलीं- इसकी चुनमुनिया खुजला रही है, आज मौका अच्छा है बजा देना डरना नहीं। थोड़ी देर भाभी पीछे से मुझे पकड़ कर मेरा बाबूराव सहलाती रहीं और मैं डॉली का नग्न स्नान देखता रहा। स्नान देखने के बाद मैं मुड़कर भाभी के होंटों को चूसने लगा इस बीच डॉली बाहर आ गई। भाभी मेरे होंट चूस रही थीं, डॉली तौलिया लपेट कर बाहर आई और अंगड़ाई लेते हुए बोली- जय जी, नहा आओ, इस रंडी को एग्जाम दिलवाना जरूरी है, इसकी सास को पता चल गया कि एग्जाम की जगह यह देवर का रस चूस रही थी तो तलाक दिलवा देगी इसे। भाभी मुझे हटाते हुई बोली- यह कुतिया कह तो ठीक रही है जय, तुम जल्दी से तैयार हो। मैं भी कपड़े पहन लेती हूँ। मैं नहा कर दस मिनट में तैयार हो गया। भाभी ने साड़ी ब्लाउज पहन रखा था और डॉली जीन्स और टी शर्ट पहने थी। नाश्ता करके निकले, डॉली ने कार ड्राइव की, कार में डॉली को कोहनी मारते हुए भाभी ने कहा- अब घर जाकर ऑपरेशन चुनमुनिया की कमांडर बन जाना।

हम लोग भाभी को सेंटर तक छोड़ सीधे वापस घर आ गए। घड़ी गयारह बजा रही थी। डॉली ने घर आकर मुझे चाय बना कर दी और चाय की चुस्कियाँ लेते हुए में उसकी टी शर्ट में कसे संतरे चोर नज़रों से घूरते हुए देखने लगा। मुझे अपने चुचियों में झांकते हुए देख कर मुस्कराते हुए बोली- ऐसे क्या देख रहे हो? अच्छी तरह से देख लो। मैं कुछ बोलता, इससे पहले ही डॉली ने अपनी टी शर्ट उतार दी, उसके दोनों कसे हुए छोटे छोटे संतरे बाहर आ गए। मेरी आँखें तो अटक कर रह गईं। डॉली होंट काटते हुए चूचियाँ हाथों से दबाकर बोली- भाभी से छोटे हैं लेकिन रसीले ज्यादा हैं चूस के देख लो। डॉली के कसे चूचे देखकर मुझसे रहा नहीं गया, मैं आगे बढ़कर अपने होंटों में उसकी निप्पल भरकर चूचे दोनों हाथों से दबाने लगा।

डॉली मुझे चिपकाते हुए बोली- काली हूँ लेकिन माल मेरा इस रंडी ललिता से दस गुना अच्छा है, एक बार चख लिया तो भाभी को भूल जाओगे। संतरे मुँह में लो न। पूरी चूची मैंने मुँह में भर ली और उसे दांतों से काटते हुए चूसने लगा। गर्म होने के बाद डॉली बोली- अन्दर चलो ना, मेरी चुनमुनिया भी भाभी की तरह चोदो ना… बड़ा मन कर रहा है। थोड़ी देर में हम लोग बिस्तर पर आ गए और हमारे कपड़े उतर गए थे। मेरा 7 इंची बाबूराव पूरा तन गया था। मेरा बाबूराव अपने हाथों में भरते हुए डॉली ने उसके टोपे पर एक पप्पी ली और बोली- आह, कितना सुन्दर बाबूराव है, उह… इसे मेरी पूसी में डालो न। उसके चूचे दबाते हुए मैंने उसे अपने नीचे लेटा लिया और उसे दबाते हुए उसके चुनमुनिया के मुख पर बाबूराव रख दिया। भाभी ने मुझे चोदना सिखा दिया था, थोड़े प्रयास से ही बाबूराव का मुँह चुनमुनिया में घुस गया, डॉली की चुनमुनिया बहुत ज्यादा कसी हुई थी, मुझे बाबूराव पेलने में दम लगाना पड़ रहा था। डॉली को दर्द हो रहा था, वो चिल्ला रही थी- उह आई ऊओह… धीरे से… आह फट गई! उसकी आँखों से आँसू भी टपक गए थे। आखिर बाबूराव अन्दर घुस गया और मैंने उसको उसको चोदना शुरू कर दिया। भाभी की खुली चुनमुनिया से डॉली की टाइट चुनमुनिया चोदने का एक अलग ही मज़ा था। 3-4 धक्कों के बाद डॉली चुदाई के मज़े लेने लगी, मुझसे चिपकाते हुए आहें भर रही थी। वो गरर्म आहें भरते हुए चिल्ला रही थी- आह… बड़ा मज़ा आ रहा है… और पेलो… फाड़ दो… बड़ा अच्छा लग रहा है। चुदाई का मज़ा बढ़ता जा रहा था, चरम सीमा पर पहुँच कर हम साथ साथ झड़े। इसके बाद डॉली ने मेरे गालों पर पप्पियों की बारिश कर दी और मुझसे चिपक गई, मैं भी उससे चिपक गया। मुझे डॉली को चोद कर आनन्द की अनुभूति हुई। मुझे उसके भाव से लगा वो एक खेली खाई लड़की नहीं है। जब हम लोग हटे तब उसकी आँखों में हल्के से प्रेम भाव के आँसू थे। वो मेरी गोद लेट गई, उसने मेरे हाथ अपनी चूचियों पर रख लिए और मेरी आँखों में आँखें डालते हुए बोली- थोड़ी देर ऐसे ही बैठो न। दोपहर के दो बज़ चुके थे। थोड़ी देर बाद मैं डॉली से बोला- मन नहीं भरा… तुम सही कह रही थीं तुम्हारा माल तो भाभी से 20 ही है। मेरा तो और मन कर रहा है। उसने प्यार से मुझे एक पप्पी देकर कहा- अब खाने के बाद दूसरा राउंड खेलेंगे, भूखे पेट तो भजन भी नहीं होते हैं। उसने अपनी अलमारी दिखाते हुए मेरी पसंद की पारदर्शी नाइटी पहनी और बाहर निकल कर खाना बनाने लगी। उसने मेरी पसंद की नाइटी पहन रखी थी पीछे से उसके चूतड़ और जांघें पूरी चमक रही थीं, गाण्ड का द्वार पूरा दिख रहा था, आगे से चूची पूरे नंगे दिख रहे थे। ये सब देखकर मेरा मन चोदने को कर रहा था। मैं पास खड़ा होकर डॉली के चूतड़ सहलाने लगा और उससे बातें करने लगा।

बातें करते हुए मुझे पता चला कि डॉली की शादी एक साल पहले हुई थी और उसका पति धरम से केस चल रहा है, दोनों का तलाक होने वाला है। वो अपने पति के साथ 15 दिन ही रही थी कि उसे पता चला कि उसके पति की दूसरी पत्नी और एक बच्चा गाँव में है, उनका बाल विवाह हुआ था, पत्नी अनपढ़ थी इसलिए उसने उसे छोड़ दिया था साथ ही साथ वो आवारा औरतों के शौकीन भी था। बहुत चोदू था, 9 इंची लम्बा बाबूराव था, पहली रात ही लड़की से औरत बना दिया और पांच सात दिन में ही कई आसनों में लेटा बैठा कर उसकी चुनमुनिया और गाण्ड चोद चोद कर दुखा डाली थी।

डॉली बोली- मैं अपने पति के साथ सिर्फ 15 दिन रही थी। चुदने के बाद चुनमुनिया की आग बढ़ जाती है, एक साल से दबा कर रखी हुई थी। ललिता मेरी पक्की सहेली है, जब भी ललिता से बात होती थी मैं उससे कहती थी कि मेरी चुनमुनिया में बहूत चुल्ल उठ रही है और चुदने का बड़ा मन कर रहा है। ललिता के साथ जब तुम्हारी मस्ती देखी तो मैंने सोच लिया तुम्हारे से चुदवा कर सेक्स का मज़ा लूंगी।
कल तुम्हारी और ललिता की मस्ती रात भर की-होल से देखती रही। आज तुम्हें अकेला देखकर अपनी प्यास पर कण्ट्रोल नहीं रख पाई। सच मुझे चुदने में बड़ा मज़ा आया।

उसने मुझे पप्पी देकर कहा- तुम मुझे बहुत अच्छे लगते हो !

उसकी आँखों से आँसू आ रहे थे, वो बोली- मुझसे मिलने आते रहना, मैं और मम्मी अकेली रहती हैं।

थोड़ी देर में खाना तैयार हो गया, हम लोग खान खाकर फिर एक बार बिस्तर पर आ गए।

मैंने अपने कपड़े उतार दिए, अब में सिर्फ एक चड्डी में था।

डॉली मुझे एकटक देख रही थी, मैंने डॉली की नाइटी की डोर खोल दी और उसे अपनी गोद में बैठा लिया, उसके दोनों चूचे अपने हाथों से दबाने लगा।

डॉली ने अपने होंट मेरे होंटों में डाल दिए, बहुत देर तक मैं उसके चूची और जांघें मलते हुए होंट चूसता रहा।

मेरा बाबूराव उसकी गाण्ड की दरार पर झटके खा रहा था।

डॉली बिस्तर पर फिसल गई और चड्डी में हाथ डालकर बाबूराव पकड़ते हुए बोली- अब इस कुत्ते को मेरी चुनमुनिया में डालो ना!

उसकी आँखों में काम ज्वाला भड़क रही थी।

दोस्तो कहानी अभी बाकी है

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