भाभी और उनकी सहेली 2

 

पिछले अंक से आगे की कहानी ………………….

Hindi Sex Stories Antarvasna Kamukta Sex Kahani Indian Sex Chudai भाभी ने कुतिया बनकर अपने होंठ मेरे लंड पर रखे और एक कुशल खिलाड़िन की तरह पूरा लण्ड मुँह में ले लिया।

मेरे मुँह से आहें निकल पड़ीं, अभी 5-6 बार ही भाभी ने लंड चूसा होगा कि मेरा बाबूराव उनके मुख में झड़ गया।

भाभी ने खड़े होकर मुझे अपनी दुधिया चूचियों से चिपका लिया और बोलीं- शुरू शुरू में सबके साथ ऐसा ही होता है। अभी थोड़ी देर में यह दुबारा खड़ा हो जाएगा। नहाने के बाद बिस्तर पर मेरी चुनमुनिया में पेलना। दो दिन में मैं पूरा चोदू बना दूँगी तुम्हें ! अभी तुम मेरी पीठ और चुतड़ों पर साबुन लगा दो।

मैं भाभी के चुतड़ों पर साबुन मल ही रहा था कि तभी भाई की आवाज़ आई- ललिता क्या कर रही हो?

भाभी घबरा गईं और बोलीं- आज ये लंच भूल गए थे, दरवाज़ा बजा कर थक गए होंगे तभी बगल वाली आंटी की छत से कूदकर आ रहे हैं।

भाभी ने दरवाज़ा खोलकर देखा और बोली- नहा रही हूँ, अभी आती हूँ, ऊपर ही रहो।

उसके बाद मुझसे बोलीं- जय, जल्दी से कमरे में जाकर छुप जाओ, ये अभी ऊपर ही हैं।

मैं दौड़ कर कमरे में नंगा ही घुस गया।

मैं भाभी के चुतड़ों पर साबुन मल ही रहा था कि तभी भाई की आवाज़ आई- ललिता क्या कर रही हो?

भाभी घबरा गईं और बोलीं- आज ये लंच भूल गए थे, दरवाज़ा बजा कर थक गए होंगे तभी बगल वाली आंटी की छत से कूदकर आ रहे हैं।

भाभी ने दरवाज़ा खोलकर देखा और बोली- नहा रही हूँ, अभी आती हूँ, ऊपर ही रहो।

उसके बाद मुझसे बोलीं- जय, जल्दी से कमरे में जाकर छुप जाओ, ये अभी ऊपर ही हैं।

मैं दौड़ कर कमरे में नंगा ही घुस गया।

भाभी भाई को दिखाने के लिए गुसलखाने में नहाने का नाटक कर रही थीं।

कमरे में आकर मुझे लगा कि भाई अन्दर आ रहे हैं तो मैं पलंग के नीचे नंगा ही छुप गया।
भाई कमरे मैं पलंग पर बैठ गए।

सामने ड्रेसिंग टेबल के शीशे में मैंने देखा तो भाई मोबाइल में शायद ब्लू फिल्म देख रहे थे, उन्होंने अपना बाबूराव बाहर निकाल लिया था और सहलाते हुए बुदबुदा रहे थे- क्या गाण्ड मारी है कुतिया की!

उनका बाबूराव बहुत मोटा, लम्बा और कड़क था, उनके सामने मुझे अपना बाबूराव चूहे जैसा लग रहा था।

तभी गुसलखाने खुलने की आवाज़ आई भाभी अन्दर कमरे में आई।

शीशे में मैंने देखा वो सिर्फ जांघों पर तौलिया लपेटी थीं उनकी चूचियाँ हवा में लहरा रही थीं। भाई को देखकर चौंकते हुए बोलीं- आप इधर यह क्या कर रहे हैं? ऊपर नहीं गए?

भाई ने उनकी तौलिया खींचते हुए कहा- तुम्हारी बिल्ली मारने के लिए औजार पैना कर रहा था। आज तो बिल्ली मारने में मज़ा आ जाएगा।

भाभी चुनमुनिया पर हाथ रखते हुए बोलीं- ऊपर चलिए न, मुझे पलंग के नीचे से शीशे में सब दिख रहा था।

भाई ने अपनी पैंट उतार दी और भाभी के हाथ चुनमुनिया के मुँह से हटाते हुए मोबाइल उनके हाथ में देकर बोले- देखो यह लड़का लड़की की कितनी मस्त गाण्ड मार रहा है। आज यहाँ कोई नहीं है क्यों न तुम्हारी गाण्ड भी एसे ही मार ली जाए।

भाभी फिल्म देखने लगीं, नंगी भाभी को भाई ने खींचकर अपनी जाँघों पर बैठा लिया और उनकी जांघें और चूचियाँ मलने लगे, भाभी उनका बाबूराव सहलाने लगीं।

भाई ने इस बीच भाभी से पूछा- प्रोजेक्ट चुनमुनिया कैसा चल रहा है?

भाभी बोली- सफल हो रहा है, एक महीने में रिजल्ट आ जाएगा।

भाभी को बाहों में खींचते हुए भाई बोले- सच ! वाह्ह मज़ा आ जाएगा, अब जरा बाबूराव चूस कर खुश कर दो न!

भाभी ने घोड़ी बनकर उनका बाबूराव मुँह में भर लिया, भाभी लपालप बाबूराव चूसे जा रहीं थी लेकिन बाबूराव झड़ने का नाम ही नहीं ले रहा था।

इसके बाद भाई ने खड़े होकर घोड़ी भाभी की गाण्ड के मुँह पर अपना बाबूराव छुला दिया।

मेरी तो सांस ही रुक गई, भाई बाबूराव अन्दर पेलते जा रहे थे और भाभी सिसकारियाँ भरने लगीं थीं, शीशे में से भाभी ने मुझे भी देख लिया था, उन्होंने मुझे आँखों से शांत रहने का इशारा किया, बाबूराव ने उनकी गाण्ड फाड़ रखी थी, चुदती भाभी की चूचियाँ झूला झूल रही थीं और वो उह आह उह कर रही थीं।

भाई एक कुशल खिलाड़ी की तरह उनकी गाण्ड चोद रहे थे और उनके चुतड़ों पर बीच बीच में जोर जोर से चांटे भी मार रहे थे।

मुझे आश्चर्य हो रहा था कि मेरा बाबूराव तो एक मिनट में झड़ जाता है और यहाँ सरपट भाभी की गाण्ड चुदती जा रही है।

मैं डरा सा उनकी चुदाई देख रहा था।

पाँच मिनट करीब तक गाण्ड चोदने के बाद भाई ने पूरा रस भाभी की गाण्ड के ऊपर छोड़ दिया और उसके बाद दोनों अलग होकर पलंग पर बैठ गए।

भाभी बोलीं- तुम ऊपर जाओ, मैं आती हूँ।

भाई पैंट पहन कर ऊपर चले गए।

भाभी ने कपड़े पहने और नीचे झांककर बोलीं- जय दस मिनट यहीं छुपे रहो, मैं इन्हें भेज कर आती हूँ।

भाई को भेजने के बाद भाभी नीचे आ गईं।

मैंने इस बीच अपने कपड़े पहन लिए थे।

उन्होंने दरवाज़ा बंद करके मुझे कस कर अपनी बाहों में भरा और बोलीं- बाल बाल बचे, वरना भगवान् जाने क्या होता।

मुझे बाँहों में भींचते हुए बोलीं- पहले खाना खा लेते हैं। अब पूरी दोपहर मेरी और तुम्हारी है।

भाभी ने खाने से पहले मुझे एक गोली और कैप्सूल दिया और बोलीं- इसे खा लो, बाबूराव हथोड़ा हो जाएगा। ये तो रोज सुबह शाम खाते हैं फिर हीरो बनते हैं। तुमने देखा कैसे हैवान की तरह गाण्ड चोदी है। अभी भी दर्द हो रहा है। इतना मोटा बाबूराव है, मज़े मज़े में चार साल से बच्चा नहीं कर रहे हैं, कहते हैं कि बच्चे के बाद और औरतों की तरह बेडौल हो जाओगी और चोदने में मज़ा भी नहीं आएगा।

मैंने भाभी से पूछा- यह प्रोजेक्ट चुनमुनिया क्या है?

भाभी मेरे बाबूराव पर हाथ फेर कर लड़खड़ाती आवाज़ में बोलीं- यह आपस की बात है।
आधे घंटे बाद भाभी और मैंने खाना खाया, इसके बाद भाभी मुझे ऊपर अपने कमरे में ले गईं।

कमरे में आने से पहले हमने सब जगह के दरवाजे बंद हैं या नहीं, यह चेक कर लिया था।

चुनमुनिया का स्वाद, पहली चुदाई का मज़ा

भाभी ने अपनी नाइटी एक झटके में उतार दी और अपनी चुनमुनिया में उंगली घुमाते हुए बोलीं- आह आओ न जय, अब देर क्यों कर रहे हो।

मैंने आगे बढ़कर उनकी चूचियाँ अपने हाथों में दबा लीं और उनकी निप्पल उमेठने लगा।

भाभी ने इस बीच मेरी शर्ट और पैंट खोल दी और मेरा बाबूराव पकड़ कर दबाते हुए बोलीं- गाण्ड तो इन्होंने चोद दी लेकिन इस चुनमुनिया की प्यास तो अब तुमसे ही बुझेगी। जल्दी से अपने नाग जय को मेरी चुनमुनिया में पेलो न।

हम दोनों अब पूरे नंगे थे।

भाभी टांगें फ़ैलाकर पलंग पर लेट गईं, उनकी चिकनी चुनमुनिया देखकर मेरा हाथ अपने लोड़े पर चला गया।

भाभी ने मुझे अपनी तरफ बिस्तर पर खींच लिया और मेरा मुँह अपनी चूचियों पर लगा लिया, मेरे बाबूराव की मुठ मारते हुए बोलीं- आह… तुम्हारा बाबूराव तो बहुत चिकना है।

मैंने उनकी चुनमुनिया पर हाथ फेरते हुए कहा- आपकी चुनमुनिया भी तो मस्त चिकनी हो रही है!

मेरी मुठ दबाते हुए भाभी बोलीं- सच मेरी फ़ुदिया सुंदर है न? इसको चूसो ना… बड़ा मज़ा आएगा, एक बार कोशिश करके देखो ना!

मैंने मुँह उल्टा करके चुनमुनिया में लगा दिया, बड़ा कसैला सा स्वाद था, मैंने मुँह हटा लिया।

भाभी बोलीं- चूसो न !

तभी भाभी ने मेरा बाबूराव मुँह में ले लिया। एक बार मैंने दुबारा चुनमुनिया पर मुँह लगा दिया, इस बार चुनमुनिया का दाना मेरे मुँह में था, अब मुझे मज़ा आ गया था।

कुछ देर बाद भाभी और में एक दूसरे के गुप्त अंग अन्दर तक मुँह घुसा के चूसने लगे, बड़ा मज़ा आ रहा था।

उसके बाद भाभी की पहल पर हम हट गए, मेरा बाबूराव पूरा हथोड़ा हो रहा था।

भाभी ने एक तकिया अपने कूल्हों गाण्ड के नीचे रखा और अपनी टांगें चौड़ी कर लीं और बोलीं- आह, अब बाबूराव पेल दो ना।

मैंने अपना बाबूराव उनकी चुनमुनिया पर लगा दिया और ताकत से अन्दर पेलने लगा, शुरू में बाबूराव घुस नहीं रहा था।
भाभी ने बाबूराव दबाते हुए अपनी चुनमुनिया में लगाया और बोलीं- अब पेलो।

मैं धीरे धीरे बाबूराव अन्दर घुसाने लगा, बाबूराव अन्दर जाने लगा था।

भाभी की आहें गूंजने लगीं, मेरी साँसें भी तेज हो रही थीं।

उन्होंने अपनी टांगें मेरी पीठ से बाँध लीं और बोलीं- आह… मज़ा आ गया… और पेलो। आह इस कमीनी को फाड़ डालो, चोदो और चोदो।

उनकी आहें मुझमें एक जोश पैदा कर रहीं थी, यह मेरी पहली चुदाई थी। अब मैं उनकी चुनमुनिया में धक्के लगा रहा था और चुदाई का मज़ा ले रहा था जो शब्दों में बयाँ नहीं किया जा सकता। भाभी अब मेरे लिए एक औरत थीं।

बाबूराव पूरा अन्दर घुस गया था, मेरी पीठ पर अपनी टांगें लपेटते हुए वो चिल्ला उठीं- जय, आह मज़ा आ गया।

मैंने चुनमुनिया में धक्के मारने शुरू कर दिए, बाबूराव सटासट उनकी चुनमुनिया मारने लगा था, गज़ब आनन्द आ गया और वो पल भी आ गया जब मेरा लावा बह निकला और उसने भाभी की पूरी चुनमुनिया भर दी।

भाभी ने मुझे अपने से चिपकाते हुए पूरा वीर्य अन्दर ले लिया।

उसके बाद हम दोनों एक दूसरे में समां गए। मेरे बाबूराव में दर्द हो रहा था, चुनमुनिया का स्वाद मैं चख चुका था।

उसके बाद लेट कर मैं और भाभी बातें कर रहे थे।

भाभी मेरी निप्पल नुकीली करते हुए बोलीं- कहीं बाहर चल कर मौज करते हैं, यहाँ तो मौका भी कम मिलेगा और हमेशा डर भी लगा रहेगा। अगले संडे मेरा बी एड का एग्जाम है, लखनऊ चलते हैं, सासू माँ की बहन शन्नो के यहाँ रुकेंगे, उनकी बेटी डॉली मेरी अच्छी सहेली है, फ्लैट में माँ बेटी अकेली रहती है। शन्नो चाची आजकल तीर्थ यात्रा पर गई हुई हैं, वहाँ सेक्स करने में मज़ा आ जाएगा। मौका मिले तो डॉली को भी चोद देना, अब तो तुम चोदना सीख ही गए हो।

भाभी की बातों से मेरा हाथ बाबूराव पर जाने लगा, भाभी ने मेरा हाथ हटा दिया और मेरा बाबूराव अपने हाथों से सहलाते हुए बोली- इसकी जगह औरतों की चुनमुनिया में होती है। अब तुम्हारी उम्र इसे औरतों के छेदों में डालने की है, हाथों से हिलाने की नहीं हैं। मन कर रहा है तो एक बार और मेरी चुनमुनिया में पेल दो।

उसके बाद एक बार फिर मैं भाभी के ऊपर चढ़ गया और उन्हें चोदने लगा।

समय का पता ही नहीं चला और 6 बज़ गए मैं भाभी को चोद कर हटा ही था कि हमें घंटी की आवाज़ सुनाई दी।

वीर्य से सने बाबूराव पर कच्छा चढ़ा कर मैं नीचे भागा।

मैंने दरवाज़ा खोला तो चाची थीं, मुझसे बोली- पड़ोस का रमेश आ रहा था, उसके साथ आ गई, चल तेरी दौड़ बची। यह ललिता तो ऊपर पढ़ रही होगी, बड़ी कामचोर है, दिन भर पढ़ने का नाटक करती है।

चाची ने आवाज़ देकर ललिता भाभी को नीचे बुला लिया और पूछा- ये तेरी पढ़ाई कब पूरी होगी?

भाभी बोलीं- मम्मीजी, अगले संडे को एग्जाम लखनऊ में है, उसके बाद पढ़ाई ख़त्म।

समय का पता ही नहीं चला और 6 बज़ गए मैं भाभी को चोद कर हटा ही था कि हमें घंटी की आवाज़ सुनाई दी।

वीर्य से सने बाबूराव पर कच्छा चढ़ा कर मैं नीचे भागा।
मैंने दरवाज़ा खोला तो चाची थीं, मुझसे बोली- पड़ोस का रमेश आ रहा था, उसके साथ आ गई, चल तेरी दौड़ बची। यह ललिता तो ऊपर पढ़ रही होगी, बड़ी कामचोर है, दिन भर पढ़ने का नाटक करती है।

चाची ने आवाज़ देकर ललिता भाभी को नीचे बुला लिया और पूछा- ये तेरी पढ़ाई कब पूरी होगी?

भाभी बोलीं- मम्मीजी, अगले संडे को एग्जाम लखनऊ में है, उसके बाद पढ़ाई ख़त्म।

चाची बोलीं- विनय तो पूना जा रहा है, तू लखनऊ कैसे जाएगी।

भाभी बोली- आप जय को मेरे साथ सैटरडे को लखनऊ भेज दो।

चाची मुझे देखकर बोलीं- क्यों जय, जायेगा इसके साथ?

मैंने कहा- आप कहोगी तो चला जाऊँगा।

चाची बोलीं- ठीक है, चला जा। तुम दोनों डॉली के यहाँ रुक जाना, आजकल अकेली है, शन्नो तो तीर्थ यात्रा पर गई हुई है। ललिता और डॉली की पटती भी अच्छी है।

मेरी और भाभी की ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा।

भाभी बोलीं- हम डॉली के यहाँ रुक जाएगें और सोमवार को वापस आ जाएँगे।

शाम को मुझे अकेला देखकर मेरे बाबूराव को सहलाते हुए भाभी बोलीं- अपने हीरो को तैयार रखना, एग्जाम तो मेरा है लेकिन पास तुम्हारे बाबूराव को होना है। सच में मज़ा आ जाएगा जब रात को तुम्हारी रानी बनकर चुदूँगी।

भाभी की बेबाक बेशरम बातें सुनकर मैंने उनकी चूचियाँ दबाई।
तभी दूर से आती हुई चाची को देखकर तेजी से गुसलखाने में मुठ मारने चला गया और मुठ मारते हुए मन ही मन उतेजना में बुदबुदाने लगा- ललिता… कुतिया… यह बाबूराव अब फेल नहीं होगा, अब तो यह तेरी चुनमुनिया का का छेद चोगुना करेगा।

दो दिन बाद शनिवार भी आ गया हम दोनों जाने को तैयार हो गए।

भाभी और मैंने शनिवार को चार बजे घर से निकलने का प्रोग्राम रखा, 4-5 घंटे में हम लखनऊ पहुँच जाते, बस से हम लोग जा रहे थे।
भाभी साड़ी ब्लाउज में थीं, मैंने टी शर्ट और जीन्स पहनी हुई थी।

शनिवार को हम बस से चले, दिसम्बर का महीना था, रात ठण्डी थी, बस 5 बजे चली 9 बजे तक हम लखनऊ पहुँच जाते।

चलती बस में मौज मस्ती

बस में पीछे वाली दो लोगों की सीट पर हम जाकर बैठ गए।

बैठते ही भाभी ने मेरा हाथ पकड़ लिया और धीरे से सहलाने लगीं।
मैंने हाथ की कोहनी धीरे से ब्लाउज के ऊपर से उनकी चूचियों पर लगा दी और उनकी चूची कोहनी से धीरे धीरे दबाने लगा।

थोड़ी देर बाद उत्तेजना में भरकर मैंने अपना एक हाथ उनके ब्लाउज के ऊपर रखकर पूरा चूची दबा दिया।

भाभी हाथ हटाकर फुसफुसाते हुए बोलीं- सात बजे जब पूरा अँधेरा हो जाए तब मज़े ले लेना, थोड़ा सब्र कर लो।

मैं संभल गया, भाभी और मैं बातें करने लगे।
पौने सात बजे करीब बस एक ढाबे पर रुकी, भाभी गुसलखाने चली गईं, मैंने दो चाय का आर्डर कर दिया।

भाभी मुस्कराते हुए चाय पीने के बाद मुझसे बोलीं- खुले पैसे मेरे पर्स से दे दो।

मैंने जब पर्स में से पैसे निकाले तो देखा उसमें उनकी ब्रा और पैंटी रखी हुई थी।

मेरी आँखें उनके ब्लाउज की तरफ चली गई।

भाभी मुस्करा उठीं और उन्होंने अपना पल्ला ब्लाउज पर इस तरह से कर लिया की चूचियों से चिपका ब्लाउज पूरा दिखने लगा।

इतने पास से देखने पर साफ़ पता चल रहा था ब्लाउज के अन्दर ब्रा नहीं है। बिना ब्रा के उभार पतले ब्लाउज से साफ़ दिख रहे थे और काली निप्पल की चोंच भी चमक रही थी।

मुझे घूरता देख भाभी होंट काटते हुए धीरे से बोलीं- अभी उतारी है तुम्हारे लिए… हॉर्न कैसे लग रहे हैं?

मैंने कहा- बजाने का मन कर रहा है।

हँसते हुए भाभी बोलीं- बस चले, तब बजा लेना। मैं भी तुम्हारा हैंडल पकड़ कर गियर बदलती रहूँगी।

तभी बस का हॉर्न बजा, हम लोग बस में आ गए।

बस जब ढाबे से से चली तब तक सात बज़ चुके थे और अँधेरा हो गया था।

बस में पीछे की बड़ी सीट खाली थी और सवारी आगे बैठी हुईं थीं हम सबसे पीछे थे।

भाभी ने मुझे दिखाते हुए अपने ब्लाउज के सारे बटन खोल लिए।

अपनी नंगी चूचियाँ दिखाते हुए बोलीं- चाय तो पी ली, अब दूध और पी लेना।

चूचियाँ ढकते हुए बोलीं- उह उह… ठण्ड लग रही है पहले बैग में से लोई (गरम चादर) उतार लो ना!

मैंने लोई बैग से निकाल लीं।
बस में मुझे ऐसा लगा कि अधिकतर लोग हमें पति पत्नी समझ रहे थे।

इस बीच बस वाले ने अन्दर की लाइट बंद कर दी थी, पूरी बस में अँधेरा हो गया था।
मेरा बाबूराव तन कर हथोड़ा हो रहा था।

लाइट बंद होते ही भाभी ने लोई ओढ़ ली और मुझे भी उढ़ा दी।
हम दोनों अब एक लोई में थे।
भाभी ने मेरा हाथ ब्लाउज के अन्दर घुसवा लिया और मेरे हाथ अपनी नंगी चूचियों पर रख दिए।
उनके दोनों नग्न चूची मेरे हाथों में थे, मैं उन्हें कस कस कर दबाने लगा, चुचियों की निप्पल पकड़ कर मैंने नुकीली कर दी थीं और बारी बारी से दोनों गुल्लों का जूस निकाल रहा था।

भाभी गर्म हो गईं थीं। उन्होंने मेरी जींस की चैन खोल कर मेरा बाबूराव अपने हाथ में ले लिया और सहलाने लगीं।

मुझसे रहा नहीं गया, मैंने चिपक कर उनके गाल चूम लिए।
उन्होंने मुझे झटके से हटा दिया, वो थोड़ा घबरा गईं थीं, मेरे बाबूराव से हाथ हटाते हुए धीरे से बोलीं- होश में रहो!

मैंने भी अपना हाथ खींच लिया।
हमारे पीछे कोई नहीं बैठा था, बस में घुप्प अँधेरा था, थोड़ी देर हम शांत रहे।
इसके बाद भाभी ने हाथ दुबारा खींच लिया और अपने पेट पर रख लिया, मुझसे रहा नहीं जा रहा था, मेरा बाबूराव उफान खा रहा था।
मैं उनका नंगा पेट और नाभि सहलाने लगा बार बार उनकी नाभि में उंगली घुसा देता था।

भाभी भी गर्म हो रही थीं, उन्होंने दुबारा जींस में से मेरा बाबूराव बाहर निकाल लिया था और अँधेरे में उसके टोपे पर उँगलियाँ फिराने लगीं।

मैं अपना हाथ उनकी साड़ी की गाँठ के अन्दर घुसाने लगा।
भाभी ने मेरा हाथ हटा कर अपनी साड़ी की गाँठ थोड़ी ढीली कर दी और मेरा हाथ नाभि पर रख दिया।
नाभि के रास्ते से आराम से हाथ उनकी साड़ी के अन्दर घुस गया।

चिकना पेडू सहलाते हुए हाथ बार चुनमुनिया प्रदेश में फिसल रहा था।

चुनमुनिया पूरी चिकनी थी, मैं चुनमुनिया में उंगली डालने की कोशिश कर रहा था पर सफल नहीं हो पा रहा था, बार बार चुनमुनिया का मुँह सहला कर रह जा रहा था।

भाभी मेरा हाथ हटाते हुए बोलीं- दो मिनट रुको।
उन्होंने झुककर अपनी साड़ी और पेटीकोट को ऊपर उठा लिया और लोई से मुझे और खुद को ठीक से ढक लिया।
मेरा हाथ अपनी गर्म जाँघों पर रख दिया।

नंगी जांघे सहलाते ही मेरे बाबूराव ने थोड़ा सा वीर्य छोड़ दिया।

उन्होंने दोनों जांघें एक दूसरे से चिपका रखी थीं, मुझे इस खेल में बड़ा आनन्द आ रहा था।
मैंने दबाब बनाते हुए अपना हाथ दोनों जाँघों के बीच घुसा दिया।

भाभी ने थोड़ी सी अपनी टांगें चौड़ी कर ली, अब मेरा हाथ सरकते हुए उनकी चुनमुनिया के द्वार पर पहुँच गया, उन्होंने एक हाथ से जोरों से मेरा बाबूराव सहलाते हुए दूसरे हाथ से मेरी उंगली चुनमुनिया के दाने पर रख दी और कान में बोलीं- पहले थोड़ा इसे सहलाओ, बड़ा मन कर रहा है।

मैं उनकी चुनमुनिया के दाने को सहलाने लगा, बीच बीच में उंगली उनकी चुनमुनिया के अन्दर भी घुसा देता था, पूरी चुनमुनिया रसीली हो रही थी।

मस्ती चरम सीमा पर थी, इसी बीच कोई स्टॉप था, लाइट खुल गई हम लोग हट गए।

इस स्टॉप पर काफी लोग उतर गए थे।

इसके बाद हमारे आगे वाली दो तरफ की सीटों पर बैठे लोग आगे सीटों पर चले गए।

अब हमारे चारों तरफ खाली था, लखनऊ आने में अभी एक घंटा था, लाइट दुबारा बंद हो गई।

हम लोग बगल में खाली पड़ी तीन लोगों की सीट पर आ गए।

भाभी ने मुझसे कहा- मेरी गोद में लेट लो, कोई नहीं देख रहा है।

मैं सीट पर पैर फेलाते हुए भाभी की गोद में लेट गया, लोई से उन्होंने मुझे ढक लिया और मेरा मुँह नीचे सरकते अपने चुचियों में लगा दिया।

मैं अब उनके दूध चूसने लगा और वो मेरा बाबूराव सहलाने लगीं।
एक चूची चूसते हुए दूसरी दबाते हुए सेक्स के आनन्द में मज़ा आ गया।

कुछ देर बाद उन्होंने मुझे उठा दिया और बोलीं थोड़ी देर मुझे भी अपनी गोद में लेटा लो न।

दोस्तो कहानी अभी बाकी है

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